परिवार को पैसे भेजना और खर्चों का हिसाब रखना क्रूरता नहीं: सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (19 दिसंबर) को पति के खिलाफ पत्नी द्वारा दायर क्रूरता और दहेज उत्पीड़न से जुड़ा मामला खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि पति द्वारा अपने माता-पिता और भाई को पैसे भेजना तथा पत्नी से घरेलू खर्चों का एक्सेल शीट में हिसाब रखने को कहना, न तो क्रूरता की श्रेणी में आता है और न ही इसे दहेज की मांग माना जा सकता है

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा,
“आरोपी-अपीलकर्ता द्वारा अपने परिवार के सदस्यों को धन भेजने की कार्रवाई को इस प्रकार नहीं देखा जा सकता कि उसके आधार पर आपराधिक मुकदमा चलाया जाए। घरेलू खर्चों का पूरा विवरण एक्सेल शीट में रखने के लिए कहना—भले ही आरोपों को उनके शब्दशः रूप में स्वीकार कर लिया जाए—क्रूरता की परिभाषा में नहीं आता। शिकायतकर्ता द्वारा आरोपित आरोपी-अपीलकर्ता का कथित आर्थिक या वित्तीय प्रभुत्व भी, किसी ठोस मानसिक या शारीरिक क्षति के अभाव में, क्रूरता का उदाहरण नहीं माना जा सकता। यह स्थिति भारतीय समाज की एक वास्तविक तस्वीर को दर्शाती है, जहाँ कई परिवारों में पुरुष अक्सर महिलाओं के वित्तीय मामलों पर नियंत्रण रखते हैं; लेकिन आपराधिक मुकदमेबाजी को व्यक्तिगत रंजिशें निकालने या हिसाब बराबर करने का माध्यम नहीं बनाया जा सकता।”

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने पति की अपील स्वीकार करते हुए की।

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